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Explainer: कौन था कासेम सुलेमानी, जिसे कहा जाता था "आतंक का आर्किटेक्ट", ट्रंप ने उसे कैसे मारा?

 Published : Apr 02, 2026 01:32 pm IST,  Updated : Apr 02, 2026 01:32 pm IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को अपने संबोधन में ईरानी कमांडर कासेम सुलेमानी को अपने पहले कार्यकाल में मारने को बड़ी उपलब्धि बताया। ट्रंप ने कहा कि अगर वह नहीं मारा जाता तो आज ईरान के पास परमाणु हथियार होता।

कासेम सुलेमानी, ईरानी सेना का पूर्व कमांडर। - India TV Hindi
कासेम सुलेमानी, ईरानी सेना का पूर्व कमांडर। Image Source : AP

Explainer: मेजर जनरल कासेम सुलेमानी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सबसे ताकतवर कमांडर थे। वे IRGC की विदेशी शाखा कुद्स फोर्स के प्रमुख थे। कुद्स फोर्स को ईरान की क्षेत्रीय नीतियों को लागू करने का मुख्य हथियार माना जाता है। सुलेमानी को ईरान में राष्ट्रीय नायक की तरह पूजा जाता था, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी उन्हें "आतंक का आर्किटेक्ट" या "शैडो कमांडर" की संज्ञा देते थे। कासेम सुलेमानी ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रबल समर्थक और प्रवर्तक थे। वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहे थे। 

कौन थे सुलेमानी?

IRGC के सबसे खूंखार कमांडर रहे सुलेमानी का जन्म 11 मार्च 1957 में ईरान के केरमान प्रांत में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। सुलेमानी ने बचपन में ही स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी थी और मजदूरी करने लगे थे। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वे IRGC में शामिल हो गए। वर्ष 1980-1988 के बीच हुए ईरान-इराक युद्ध में उन्होंने बतौर कमांडर साहसिक लड़ाई लड़ी और अपनी पहचान बनाई। इस युद्ध के बाद उन्होंने दक्षिण-पूर्वी ईरान में अफीम तस्करों के खिलाफ अभियान चलाया। 1998 में सुलेमानी को कुद्स फोर्स का कमांडर बना दिया गया, जो ईरान की विदेशी गुप्त कार्रवाइयों, प्रॉक्सी मिलिशिया समूहों को समर्थन और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने का काम करता है। कुद्स फोर्स ईरान की "एक्सपोर्ट द रेवोल्यूशन" नीति का मुख्य साधन था।


मिडिल-ईस्ट में तैयार किया ईरान के कई प्रॉक्सी

सुलेमानी के नेतृत्व में कुद्स फोर्स ने लेबनान के हिजबुल्लाह, इराक के शिया मिलिशिया (जैसे कताइब हिजबुल्लाह), सीरिया में बशर अल-असद की सरकार, यमन के हूती विद्रोहियों और फिलिस्तीनी गुटों (हमास, इस्लामिक जिहाद) जैसे प्रॉक्सी तैयार किए गए। सुलेमानी का काम जिनको हथियार देना, प्रशिक्षण , फंडिंग और रणनीतिक समर्थन करना था। सुलेमानी को "असिमेट्रिक वॉरफेयर" (असमान युद्ध) का मास्टर माने जाते थे। इराक पर 2003 में अमेरिकी हमले के बाद उन्होंने शिया मिलिशिया को प्रशिक्षित किया, जिसके कारण सड़क किनारे बम (IEDs) से सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मारे गए। सुलेमानी को आईईडी बमों का जनक कहा जाता था। 

सैकड़ों अमेरिकी सैनिकों की जान लेने का दोषी

अमेरिकी अनुमान के अनुसार ईरानी कमांडर सुलेमानी सैकड़ों अमेरिकी सैनिकों की जान लेने का दोषी था। साल 2005-2011 के दौरान सुलेमानी समर्थित गुटों ने इराक में 500 से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों की जान ली। सीरिया के गृहयुद्ध में उन्होंने रूस को शामिल कर असद सरकार बचाई। इसके साथ ही ISIS के खिलाफ लड़ाई में भी उन्होंने इराकी और सीरियाई मिलिशिया को संगठित किया। ईरान में उन्हें "हाजी कासेम" कहकर सम्मान दिया जाता था। 

अयातुल्ला खामेनेई के सबसे करीबी और ईरान के दूसरे ताकतवर शख्स

सुलेमानी ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के सबसे करीबी सलाहकार थे और देश की दूसरी सबसे ताकतवर शख्सियत माने जाते थे। पश्चिमी देशों ने उन्हें आतंकवाद का प्रतीक बताया, क्योंकि उन्होंने ईरान की "एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस" बनाई, जो अमेरिका और इजरायल के खिलाफ काम करती थी।


Trump ने सुलेमानी को क्यों मारा?

ईरानी कमांडर सुलेमानी अमेरिका के लिए नासूर बन चुका था। अमेरिका ने अपने सैकड़ों सैनिकों की हत्या के लिए सुलेमानी को आतंकवादी घोषित कर दिया था। इसके बाद 3 जनवरी 2020 को बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास अमेरिका ने MQ-9 रेपर ड्रोन से हेलफायर मिसाइल हमले में सुलेमानी और इराकी मिलिशिया नेता अबू महदी अल-मुहंदिस को मार गिराया। इस हमले का आदेश तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया था। सुलेमानी को मारने के बाद ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया था कि वह अमेरिकी राजनयिकों और सैनिकों पर "आसन्न हमले" की साजिश रच रहे थे। दिसंबर 2019 में इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ने अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट हमला किया था, जिसमें एक अमेरिकी ठेकेदार की मौत हो गई। इसके अलावा बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले के पीछे भी सुलेमानी का हाथ बताया गया था। 

सुलेमानी की हत्या को ट्रंप ने बताया बड़ी कामयाबी

ईरान से चल रहे युद्ध के दौरान बृहस्पतिवार को ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान ईरान के इस खतरनाक कमांडर का जिक्र किया और उन्हें "दुनिया का नंबर-1 आतंकवादी" बताया। ट्रंप ने कहा कि सुलेमानी को मारना उनके पहले कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि उसके जिंदा रहने से ईरान और मजबूत हो जाता। ट्रंप ने कहा कि ओबामा ने सुलेमानी के साथ न्यूक्लियर डील की थी और ईरान को 1.7 अरब डॉलर के हरे-हरे नोट दिए थे। मगर मैंने न्यूक्लियर डील को खत्म कर दिया। ट्रंप ने कहा-अगर सुलेमानी उस वक्त नहीं मारा गया होता तो ईरान के पास और परमाणु बम होता। 

ऐसे मारे गए सुलेमानी

सुलेमानी दमिश्क से बगदाद पहुंचे थे। हवाई अड्डे से निकलते समय उनकी गाड़ियों के काफिले पर ड्रोन से मिसाइलें दागी गईं। हमला इतना सटीक था कि सुलेमानी और उनके साथी तुरंत मारे गए। अमेरिका ने इसे "फ्लॉलेस प्रिसीजन स्ट्राइक" बताया। यह हमला विवादास्पद रहा। कुछ विशेषज्ञों और संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, क्योंकि "आसन्न खतरे" का कोई सार्वजनिक सबूत नहीं दिया गया। बुश और ओबामा प्रशासन ने भी सुलेमानी को निशाना बनाने पर विचार किया था, लेकिन क्षेत्रीय युद्ध भड़कने के डर से मना कर दिया था। ईरान ने इसे "राज्य आतंकवाद" कहा और बदला लिया। ईरान ने तब इराक में अमेरिकी बेसों पर मिसाइलें दागीं, जिसमें 110 अमेरिकी सैनिक घायल हुए (कोई मौत नहीं हुई)। सुलेमानी की मौत के बाद ईरान में उन्हें शहीद घोषित किया गया। 

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